
शिक्षक सुनील मोरे की मौत ने शिक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल
दो बच्चों के साथ गोदावरी में कार समेत छलांग; मौत से पहले लगाए कथित आरोपों से प्रशासन में खलबली
नांदेड, एम अनिलकुमार| एक शिक्षक… दो मासूम बच्चे… और मौत से पहले सोशल मीडिया पर उठाए गए गंभीर सवाल! शिक्षक सुनील मोरे की दर्दनाक मौत ने अब केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भोकर तहसील के बेंबर गांव निवासी और हिमायतनगर तहसील के पोटा (बु.) जिला परिषद स्कूल में कार्यरत शिक्षक सुनील नारायण मोरे ने 17 जुलाई को अपनी 12 वर्षीय बेटी सारा और 8 वर्षीय बेटे सुमित के साथ मुगट पुल से गोदावरी नदी में कार में बैठकर छलांग लगा दी। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने तलाशी अभियान चलाकर तीनों के शव बरामद किए।
शिकायतें थीं, जांच थी… फिर ‘सिस्टम’ ने सुना क्यों नहीं?
मौत से पहले सुनील मोरे द्वारा लगाए गए कथित व्हॉट्सऐप स्टेटस ने पूरे मामले को गंभीर मोड़ दे दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने वर्ष 2023 से 2025 के दौरान हुई विभिन्न जांचों, शिकायतों और कथित मानसिक प्रताड़ना का उल्लेख किया था, शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों और एक सहकर्मी से परेशानी होने का दावा भी उनके स्टेटस में किए जाने की बात सामने आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एक शिक्षक वर्षों से शिकायतों, जांच और कथित मानसिक दबाव से गुजर रहा था, तो उसकी बात सुनने वाली व्यवस्था आखिर कहां थी? क्या शिकायत करने वाला शिक्षक ही आखिरकार दोषी बना दिया जाता है?
शिक्षा विभाग में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है। लेकिन क्या इस प्रक्रिया के दौरान शिक्षक पर असहनीय मानसिक दबाव बनाया गया? क्या जांच निष्पक्ष थी? क्या उनकी शिकायतों पर उचित सुनवाई हुई? इन सवालों के जवाब अब निष्पक्ष जांच से ही सामने आने चाहिए।
सुनील मोरे के आखिरी कथित स्टेटस में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला सोशल मीडिया या जनभावना से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच से होना चाहिए। लेकिन इन आरोपों को नजरअंदाज कर मामले को दबाने की कोशिश हुई तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे।
अब जांच केवल मौत की नहीं, पूरी व्यवस्था की होनी चाहिए!
इस मामले में केवल मौत का कारण जानना पर्याप्त नहीं है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच हुई सभी शिकायतों, जांचों, आदेशों, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और शिक्षक के कथित मानसिक उत्पीड़न की पूरी पृष्ठभूमि की जांच आवश्यक है।
एक परिवार खत्म हो गया। अब इस त्रासदी पर केवल शोक व्यक्त कर मामला खत्म किया जाएगा या मौत से पहले उठाए गए सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे, यही सबसे बड़ा सवाल है।
सुनील मोरे की मौत के पीछे का सच सामने आना चाहिए। आरोप सही हैं तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और गलत हैं तो भी सच्चाई स्पष्ट होनी चाहिए। लेकिन सच को दबाया नहीं जाना चाहिए यही इस दर्दनाक घटना के बाद सबसे बड़ी मांग है।
