
हिमायतनगर, एम अनिलकुमार | अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर हिमायतनगर रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण किया गया, लेकिन आज भी यात्रियों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों का आरोप है कि केवल रंग-रोगन और बाहरी सजावट कर विकास का दिखावा किया गया है, जबकि यात्रियों की रोजमर्रा की समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं।
स्टेशन का वेटिंग हॉल अधिकांश समय बंद रहने से महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, कोरोना काल से बंद पड़ी पार्सल सेवा आज तक शुरू नहीं होने से व्यापारियों और आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
यात्रियों का कहना है कि स्टेशन परिसर में रेलवे पुलिस चौकी नहीं होने के कारण चोरी की घटनाओं की आशंका बनी रहती है। प्लेटफॉर्म पर शराबियों का जमावड़ा बढ़ने से विशेष रूप से महिला यात्रियों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। यात्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर कोच पोजीशन डिस्प्ले बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे यात्रियों को अपने डिब्बे की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती। स्टेशन पर विज्ञापन के लिए आवश्यक एलईडी टीवी स्क्रीन भी नहीं लगाए गए, जिससे रेलवे के संभावित राजस्व पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है।

स्थानीय नागरिकों ने धनबाद एक्सप्रेस का हिमायतनगर में ठहराव देने तथा काजीपेट एक्सप्रेस को पुनः शुरू करने की मांग की है। वहीं, स्टेशन पर पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं है और कई स्थानों पर पाइपलाइन से पानी रिसने के कारण पानी की बर्बादी हो रही है। यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि स्टेशन का सौंदर्यीकरण तो कर दिया गया, लेकिन महिलाओं और यात्रियों के लिए आवश्यक शौचालय एवं प्रसाधनगृह की पर्याप्त सुविधा आज भी उपलब्ध नहीं है। इसका सबसे अधिक असर महिला यात्रियों पर पड़ रहा है।

हाल ही में मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के निरीक्षण का उल्लेख करते हुए नागरिकों ने मांग की है कि केवल रंग-रोगन पर संतोष न किया जाए, बल्कि यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए प्रतीक्षालय, शौचालय, पार्सल सेवा, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएँ तत्काल उपलब्ध कराई जाएँ। यात्रियों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बुनियादी सुविधाएँ नहीं मिलतीं, तो अमृत भारत योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इसलिए रेलवे प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए शीघ्र ठोस कार्रवाई करनी चाहिए|
“जब करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उद्घाटन से पहले ही छत टपकने लगे, प्लेटफॉर्म में दरारें दिखने लगें और अधूरे काम सामने आने लगें, तो सवाल केवल निर्माण का नहीं, बल्कि गुणवत्ता और जवाबदेही का भी उठता है। आखिर यदि शुरुआत ही कमजोर है, तो आने वाले वर्षों में इस विकास कार्य की स्थिति क्या होगी?” वामनराव मीराशे, राष्ट्रवादी काँग्रेस तालुकाध्यक्ष हिमायतनगर
