
कृषि विभाग की लापरवाही से किसान आर्थिक संकट में, आंदोलन की चेतावनी
हिमायतनगर, एम अनिलकुमार| हिमायतनगर तहसील में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसानों ने तहसील कृषि विभाग पर घटिया बीजों की बिक्री, समय पर जांच रिपोर्ट न देने, कृषि मार्गदर्शन की कमी और सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों के अनुसार, कृषि विभाग ने कुछ खाद-बीज विक्रेताओं से जांच के लिए नमूने (सैंपल) लिए थे, लेकिन अब तक उनकी रिपोर्ट जारी नहीं की गई। इस बीच किसानों ने उन्हीं बीजों की बुवाई कर दी, जिनमें से कई खेतों में बीज अंकुरित ही नहीं हुए। किसानों का कहना है कि यदि बुवाई पूरी होने के बाद रिपोर्ट आएगी तो उसका कोई लाभ नहीं होगा।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कृषि विभाग के कई कर्मचारी मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित हो रहा है। खरीफ सीजन शुरू होने के बावजूद किसानों के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन शिविर आयोजित नहीं किए गए। परिणामस्वरूप कई किसानों ने समय से पहले बुवाई कर दी और अब दोबारा बुवाई का संकट खड़ा हो गया है।
इसके अलावा, कुछ खाद एवं बीज विक्रेताओं द्वारा किसानों से मनमाने दाम वसूलने के भी आरोप लगाए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर पहले भी राष्ट्रवादी कांग्रेस के वामनराव पटेल के नेतृत्व में कृषि कार्यालय के सामने अर्धनग्न आंदोलन किया गया था। किसानों का आरोप है कि सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ पात्र किसानों के बजाय अधिकारियों और कर्मचारियों के करीबी लोगों को दिया जा रहा है।
इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस के तालुका अध्यक्ष वामनराव पाटील वडगांवकर ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आमरण अनशन और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इस संबंध में तहसील कृषि अधिकारी सिड्डाम ने कहा कि, अगले दो-चार दिनों में किसानों के लिए मार्गदर्शन शिविर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कृषि सहायकों द्वारा भी किसानों को मार्गदर्शन दिया जा रहा है। हालांकि, बीजों के सैंपल की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। वहीं, बीज अंकुरित न होने की शिकायतों पर उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
किसानों का कहना है कि यदि कृषि विभाग की लापरवाही के कारण कोई किसान आर्थिक तंगी से परेशान होकर कोई गंभीर कदम उठाता है, तो इसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होनी चाहिए। फिलहाल किसान प्रशासन से त्वरित कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
