
स्थानीय किसानों को खाद न देकर बाहरी लोगों को आपूर्ति का आरोप; कृषि विभाग अधिकारी की भूमिका पर सवाल
हिमायतनगर, एम अनिलकुमार | खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही हिमायतनगर तालुका में खाद की कमी का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। खाद वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजितदादा गुट) के तालुका अध्यक्ष वामनराव पाटील वडगावकर ने आरोप लगाया है कि कृषि दुकानदारों और कृषि विभाग की कथित मिलीभगत से स्थानीय किसानों को खाद से वंचित कर कालाबाजारी करने की कोशिश की जा रही है।
इसी के विरोध में सोमवार (8 जून) को हिमायतनगर स्थित तालुका कृषि अधिकारी कार्यालय के सामने वामनराव पाटील वडगावकर ने करीब एक घंटे तक अर्धनग्न आंदोलन कर कृषि विभाग और खाद विक्रेताओं के कथित मनमाने रवैये के खिलाफ आवाज उठाई। इस आंदोलन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिन्हें किसानों का समर्थन भी मिल रहा है।
OTP के जरिए खाद वितरण में गड़बड़ी का आरोप
आरोप है कि सरकार द्वारा किसानों के लिए उपलब्ध कराए गए खाद भंडार को कुछ दुकानदार अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के मोबाइल पर OTP लेकर “खाद खत्म हो गई” कहकर स्थानीय किसानों को खाद देने से इनकार कर रहे हैं। इससे खरीफ सीजन की शुरुआत में ही किसानों को अधिक दाम देकर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि स्थानीय किसानों को प्राथमिकता देने के बजाय खाद का वितरण विदर्भ क्षेत्र के कुछ रिश्तेदारों और पसंदीदा लोगों को किया जा रहा है।
“जो करना है करो” – किसानों का अपमान?
आंदोलन के दौरान कुछ किसान खाद की कमी और वितरण में कथित गड़बड़ी की शिकायत लेकर कृषि कार्यालय पहुंचे थे। किसानों का आरोप है कि कुछ खाद विक्रेताओं ने उनसे अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। “जो करना है करो” जैसे शब्दों का प्रयोग कर किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई। इस बीच, तालुका कृषि अधिकारी श्रीराम साहब से मुलाकात करने पर उन्होंने बताया कि खाद नियंत्रण के लिए नियुक्त कर्मचारी फिलहाल मौजूद नहीं हैं, इसलिए तत्काल कार्रवाई संभव नहीं है। इस जवाब से किसानों में और अधिक नाराजगी फैल गई।
50 से अधिक किसान आंदोलन में शामिल
प्रशासन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण करीब 50 किसानों ने कृषि कार्यालय के सामने अर्धनग्न आंदोलन शुरू कर दिया और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। समाचार लिखे जाने तक किसानों के हित में कृषि विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था। इस कारण शहर और तालुका में यह चर्चा तेज हो गई है कि कृषि अधिकारी, नियंत्रण अधिकारी और खाद दुकानदारों के बीच कथित मिलीभगत हो सकती है।
किसानों की प्रमुख मांगें
तालुका में उपलब्ध खाद भंडार की तत्काल जांच की जाए। स्थानीय किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जाए। बाहरी क्षेत्रों में खाद की बिक्री तुरंत रोकी जाए। दोषी दुकानदारों और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। किसानों की शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाए। “किसानों को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा,” ऐसा चेतावनी भरा बयान वामनराव पाटील वडगावकर ने दिया है। खरीफ सीजन से पहले पैदा हुई इस स्थिति से पूरे तालुका के किसानों में भारी नाराजगी का माहौल बना हुआ है।
