
रंग-रंगना हुआ, लेकिन सफाई व्यवस्था ध्वस्त; रेलवे प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ पर यात्रियों का आक्रोश
हिमायतनगर, एम अनिलकुमार| हिमायतनगर रेलवे स्टेशन के विकास कार्यों से स्टेशन का चेहरा-मोहरा बदलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन चमक-दमक और रंग-रंगना के पीछे यात्रियों को परेशान करने वाली मूलभूत समस्याओं की ओर रेलवे प्रशासन ने मानो आंखें मूंद ली हैं। प्लेटफॉर्म पर जमा कचरा, दीवारों पर पान-तंबाकू की पीक के दाग और अस्वच्छ परिसर को देखकर यात्रियों में भारी नाराजगी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ‘अमृत भारत’ के तहत हुआ यह कायापलट आखिर किसके लिए है?
हिमायतनगर रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपये के विकास कार्य किए गए हैं। नए रंग-रंगाव के कारण स्टेशन दूर से आकर्षक दिखाई देता है, लेकिन प्लेटफॉर्म पर कदम रखते ही इस सौंदर्यीकरण की असली तस्वीर सामने आ जाती है। इससे पहले भी स्टेशन के विकास कार्यों की गुणवत्ता, पेयजल, डिजिटल डिस्प्ले और अन्य यात्री सुविधाओं को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
दीवारें रंगीं, लेकिन गंदगी बरकरार! रेलवे स्टेशन की दीवारों पर नया रंग करने और उस पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद इन दीवारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? पान-तंबाकू की पीक से दीवारें बदरंग होने तक रेलवे प्रशासन क्या कर रहा है? सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वालों के खिलाफ कार्रवाई के नियम मौजूद हैं, लेकिन हिमायतनगर स्टेशन पर इन नियमों का पालन होता है या नहीं, यह भी गंभीर सवाल है।

रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही, फिर सफाई पर विशेष ध्यान कब? हिमायतनगर रेलवे स्टेशन पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है। ऐसे स्थान पर नियमित सफाई, कचरा संग्रहण और प्लेटफॉर्म का रखरखाव कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन की मूलभूत जिम्मेदारी है। दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड मंडल में यांत्रिक सफाई और स्वच्छता अभियानों के माध्यम से विभिन्न पहल किए जाने का दावा किया जाता है। ऐसे में यात्रियों का सवाल है कि हिमायतनगर स्टेशन पर इन व्यवस्थाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है या स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित है?
अधिकारियों के निरीक्षण होते हैं, निर्देश दिए जाते हैं; फिर बदलाव कहां है? – स्टेशन के विकास कार्यों का निरीक्षण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पहले भी किया जा चुका है। निरीक्षण, निर्देश और आश्वासन के बाद भी यदि यात्रियों को वही समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं, तो इन निरीक्षणों का आखिर फायदा क्या? मार्च २०२६ में नांदेड मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विभिन्न स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा और विकास कार्यों की समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई थी। लेकिन केवल निरीक्षण कर लेना ही प्रशासन की जिम्मेदारी पूरी होने का प्रमाण नहीं हो सकता। यात्रियों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला बदलाव चाहिए। रेलवे प्रशासन को फोटो खिंचवाने के बजाय प्लेटफॉर्म पर उतरकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।
सिर्फ रंगरोगन नहीं, यात्रियों को चाहिए स्वच्छ और सुरक्षित स्टेशन – हिमायतनगर रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण हुआ है, यह स्वागत योग्य है। लेकिन रंग-रोगन की चार दीवारों से अधिक महत्वपूर्ण यात्रियों के लिए स्वच्छ प्लेटफॉर्म, साफ शौचालय, पर्याप्त पेयजल, बेहतर कचरा प्रबंधन और सुरक्षित वातावरण है। रेलवे प्रशासन को अब तत्काल प्लेटफॉर्म की नियमित सफाई, पर्याप्त कचरा पेटियों की व्यवस्था, पान-तंबाकू की पीक थूकने वालों पर जुर्माना, सीसीटीवी के माध्यम से गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई और सफाई कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही यात्रियों की शिकायतों के लिए प्रभावी व्यवस्था तथा विकास कार्यों की गुणवत्ता और रखरखाव के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
हिमायतनगरकरों का सीधा सवाल— “साहब, रंगरंगाव की फोटो खिंचवा ली हो तो अब एक बार प्लेटफॉर्म पर उतरकर वहां की गंदगी भी देख लीजिए!” हिमायतनगर रेलवे स्टेशन को बाहर से चमकाने के बजाय अंदर से भी स्वच्छ और सुसज्जित बनाने की जरूरत है। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ कब टूटती है, या फिर यात्रियों की शिकायतें भी प्लेटफॉर्म पर पड़े कचरे की तरह यूं ही पड़ी रहती हैं?
