
बलीराजा मुहाने पर खड़ा है; सरकार चुप्पी साधे है !
सूखे ने तोड़ी किसानों की कमर !
संपूर्ण कर्जमाफी, प्रति एकड़ कम से कम ₹50 हजार सहायता की मांग !
वरना तहसील पर होगा बड़ा किसान मोर्चा !
हिमायतनगर, एम अनिलकुमार | विगत माह से बारिश ने मुंह मोड़ लिया है और हिमायतनगर तहसील में किसान भीषण सूखे की मार झेल रहे हैं। खेतों में खड़ी तूर, कपास, सोयाबीन, मूंग, उड़द, हल्दी और गन्ने की फसलें आंखों के सामने सूख रही हैं। किसान आर्थिक संकट में फंस चुका है, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। “किसान मौत के मुहाने पर खड़ा है, आखिर सरकार कब जागेगी?” यह सीधा सवाल पूर्व सांसद सुभाषराव वानखेड़े ने हिमायतनगर तहसील कार्यालय पर आयोजित किसान आंदोलन के दौरान उठाया।
पक्षीय राजनीति को किनारे रखते हुए तहसील के हजारों किसान एकजुट होकर तहसील कार्यालय पहुंचे। किसानों ने हिमायतनगर तहसील को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने और नुकसानग्रस्त किसानों को तत्काल आर्थिक राहत देने की मांग की। वानखेड़े ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को तत्काल राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में हजारों किसानों की ताकत के साथ तहसील कार्यालय पर बड़ा आंदोलन और रुद्र मोर्चा निकाला जाएगा। उन्होंने प्रमुख रूप से संपूर्ण कर्जमाफी, फसल बीमा का तत्काल लाभ तथा फसल नुकसान के लिए कम से कम ₹50 हजार प्रति एकड़ सहायता देने की मांग की।
“कागजों पर नहीं, खेत की मेड़ पर जाकर हालात देखिए” – वानखेड़े ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर फाइलों और कागजों के आधार पर किसानों की स्थिति का आकलन करने से वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आएगी। अधिकारी सीधे खेतों में जाकर सूखी फसल और किसानों की दयनीय स्थिति देखें और तत्काल राहत की कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि “किसान जिंदा रहेगा, तभी देश मजबूत रहेगा,” इसलिए सरकार को राजनीतिक गणित से ऊपर उठकर किसान हित में तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
महावितरण के लापरवाह रवैये से किसान और संकट में – बारिश का अभाव पहले ही किसानों की चिंता बढ़ा चुका है। दूसरी ओर महावितरण की अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण उपलब्ध पानी से भी फसल बचाना मुश्किल हो गया है। किसानों ने कृषि पंपों को नियमित और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने तथा बिजली आपूर्ति में हो रही परेशानी को तत्काल दूर करने की मांग की।

“बड़े लोगों की कर्जमाफी आसान, किसान के लिए शर्तों का जाल!”— पूर्व विधायक माधवराव पाटील जवळगांवकर – पूर्व विधायक माधवराव पाटील जवळगांवकर ने भी सरकार की किसान नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों के कर्ज के मामले में सरकार का रवैया अलग रहता है, जबकि किसान कर्जमाफी मांगता है तो उसके सामने तरह-तरह की शर्तें और नियम खड़े कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल बीमा का हक भी आसानी से नहीं मिल रहा है, जबकि महावितरण सहित विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते किसान परेशान हैं। जवळगांवकर ने मांग की, कि सभी जटिल निकष और शर्तों को किनारे रखते हुए नुकसानग्रस्त किसानों को संपूर्ण एवं तत्काल सहायता दी जाए तथा प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख तक की आर्थिक मदद देकर किसानों को संकट से बाहर निकाला जाए।
“अधिकारी सुनते नहीं, जनता के काम होते नहीं—फिर जनप्रतिनिधियों को चुनने का फायदा क्या?” – आंदोलन के दौरान किसानों ने तहसील कार्यालय, पंचायत समिति, महावितरण, भूमिअभिलेख और रजिस्ट्री कार्यालय सहित विभिन्न विभागों के कामकाज पर भी नाराजगी जताई। साधारण कामों के लिए भी किसानों और आम नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अधिकारियों-कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से मनमानी बढ़ने का आरोप भी किसानों ने लगाया, किसानों ने सवाल उठाया कि “अगर जनता के काम नहीं होते, अधिकारी आम आदमी की बात नहीं सुनते और प्रशासन पारदर्शी तरीके से काम नहीं करता, तो जनप्रतिनिधियों को चुनने का फायदा क्या?”
अब आश्वासन नहीं, तत्काल राहत चाहिए – आंदोलन में पूर्व सांसद सुभाषराव वानखेड़े, पूर्व विधायक माधवराव पाटील जवळगांवकर, हिमायतनगर नगराध्यक्ष शेख रफीक भाई, वामनराव पाटील वडगांवकर, कल्याण पाटील पळसपूरकर, दत्ता पाटील सोनारीकर, प्रल्हाद पाटील टेंभुर्णीकर सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों की विभिन्न मांगों का ज्ञापन तहसीलदार सौ. पल्लवी टेमकर के माध्यम से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कृषि मंत्री तथा जिलाधिकारी, नांदेड को भेजा गया। किसानों का स्पष्ट कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। खेत सूख चुके हैं, किसान आर्थिक संकट में है और सरकार को तत्काल राहत का फैसला लेना होगा। अन्यथा किसान आंदोलन और अधिक तीव्र होने के संकेत इस आंदोलन से साफ दिखाई दिए।
