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हिमायतनगर में बड़ी बैंकों की शाखाएं खोलना जरूरी – C.A.भावेश पिंचा

वित्त कंपनियों के कर्जजाल में फंस रहा आम आदमी
52 ग्राम पंचायतों का विशाल क्षेत्र, लेकिन बैंकिंग सुविधाएं सीमित; किसान, महिला बचत समूह, व्यापारी और आम नागरिक परेशान

हिमायतनगर, एम.अनिलकुमार। हिमायतनगर तहसील में बढ़ते आर्थिक व्यवहार के बावजूद बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार नहीं होना अब गंभीर सवाल बन गया है। 52 ग्राम पंचायतों के विशाल ग्रामीण क्षेत्र का आर्थिक केंद्र होने के बावजूद हिमायतनगर में बड़ी बैंकों की पर्याप्त शाखाएं नहीं हैं। इसका सीधा असर किसानों, व्यापारियों, महिला बचत समूहों, लघु उद्यमियों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है।

तहसील मुख्यालय में राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों की सीमित शाखाओं के कारण मौजूदा बैंकों पर लगातार बढ़ता दबाव दिखाई दे रहा है। कर्ज, फसल ऋण, व्यवसाय ऋण, बचत खाते और अन्य आर्थिक सेवाओं के लिए ग्राहकों को लंबी प्रक्रिया और प्रतीक्षा का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तत्काल कर्ज की जरूरत वाले नागरिक मजबूरी में वित्त कंपनियों का रुख कर रहे हैं।

आसान कर्ज के नाम पर बढ़ रहा कर्ज का बोझ
वित्त कंपनियों से कर्ज अपेक्षाकृत आसानी से मिल जाता है, लेकिन ब्याज, प्रोसेसिंग शुल्क, बीमा और अन्य शुल्कों की पूरी जानकारी नहीं होने पर ग्राहक पर वास्तविक आर्थिक बोझ काफी बढ़ सकता है। कई मामलों में एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेने की नौबत आ रही है। यानी ‘कर्ज चुकाने के लिए कर्ज’ का दुष्चक्र आम नागरिकों को आर्थिक संकट की ओर धकेल रहा है। ऐसी स्थिति में मजबूत, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बैंकिंग व्यवस्था उपलब्ध कराना बेहद जरूरी हो गया है

HDFC, ICICI, Axis और Bank of Baroda की शाखाओं की जोरदार मांग – C.A. भावेश पिंचा ने कहा कि हिमायतनगर जैसे तहसील मुख्यालय में HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Bank of Baroda जैसी बड़ी बैंकों की शाखाएं शुरू की जानी चाहिए। नई बैंक शाखाएं आने से ग्राहकों को विकल्प मिलेंगे और बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं में सुधार होने की संभावना है। विशेषकर किसानों को फसल एवं कृषि ऋण, ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के लिए कर्ज, महिला बचत समूहों को वित्तीय सहायता तथा व्यापारियों और लघु उद्यमियों को व्यवसाय ऋण आसानी से उपलब्ध हो सकता है।

52 ग्राम पंचायतों का क्षेत्र, फिर भी बैंकिंग व्यवस्था सीमित
हिमायतनगर तेलंगाना और विदर्भ की सीमा से लगा महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र है। तहसील की 52 ग्राम पंचायतों के हजारों नागरिकों के आर्थिक व्यवहार का प्रमुख केंद्र हिमायतनगर है। इसके बावजूद बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हुआ है| वर्तमान में राष्ट्रीयकृत दो, जिला बैंक की एक और निजी क्षेत्र की दो शाखाएं कार्यरत हैं। बढ़ती आबादी और बढ़ते आर्थिक व्यवहारों की तुलना में यह व्यवस्था अपर्याप्त साबित हो रही है।

अब जनप्रतिनिधियों को सिर्फ आश्वासन नहीं, पहल करनी होगी
हिमायतनगर में नई बड़ी बैंक शाखाएं शुरू करने की मांग पहले भी उठ चुकी है। लेकिन मांग के बावजूद ठोस पहल नहीं होने से नागरिकों में नाराजगी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक नेताओं और बैंक प्रशासन को अब इस मुद्दे पर गंभीरता से आगे आना होगा। बड़ी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर हिमायतनगर में नई शाखाएं मंजूर कराने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।

C.A. भावेश पिंचा एवं जागरूक नागरिकों ने कहा कि, 52 ग्राम पंचायतों का विशाल क्षेत्र, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और लगातार बढ़ते आर्थिक व्यवहारों के बावजूद बैंकिंग सुविधाओं की कमी स्वीकार्य नहीं है। आम नागरिकों को वित्त कंपनियों के कर्जजाल से बचाने के लिए हिमायतनगर में बड़ी बैंकों की शाखाएं खोलना अब समय की मांग नहीं, बल्कि जरूरत और मजबूरी बन गई है।

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